Friday, 2 November 2018

वक़्त

|| हस्ते तो बचपन में थे,
अभी तो दूर से हँसी की आवाज़ पे मुस्कुराया करते हैं।

नाराज़ तो तब होते थे जब पता था कि यार-दोस्त मना लेंगे,
अभी तो नाराज़गी भी ख़फ़ा हो चली है।

ज़िन्दगी तो पहले जिया करते थे,
आजकल तो ज़िम्मेदारियाँ निभाया करते है।

दुनिया तभ भी ख़ूबसूरत थी और आगे भी हसीन रहेगी,
वक़्त के साथ बस देखने का नज़रिया बदल जाया करता है।l


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